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आगे की पुनर्कल्पना का रोडमैप

आगे की पुनर्कल्पना का रोडमैप

प्रसंग

नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने "टेक्नोलॉजी सर्विसेज़रीइमेजिनेशन अहेड" नाम से एक बड़ा 10-साल का स्ट्रेटेजिक ब्लूप्रिंट जारी किया है । यह रोडमैप 2035 तक भारत के टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ सेक्टर को $850 बिलियन के वैल्यूएशन तक बढ़ाने का एक पक्का रास्ता बताता है ।

 

रोडमैप के बारे में

यह क्या है? यह एक विज़नरी फ्रेमवर्क है जिसे भारत की टेक इंडस्ट्री को ट्रेडिशनल "लेबर-आर्बिट्रेज" (कम लागत वाली आउटसोर्सिंग) मॉडल से AI-नेटिव, IP-लेड और प्लेटफॉर्म-ड्रिवन इकोसिस्टम में बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है

मुख्य उद्देश्य:

  • इकोनॉमिक स्केलिंग: इस सेक्टर को 2035 तक $850 बिलियन के लेवल तक पहुंचाने के लिए काफी बढ़ाना।
  • आर्किटेक्चरल लीडरशिप: बैक-ऑफिस सपोर्ट से ग्लोबल AI सिस्टम आर्किटेक्चर को लीड करने की ओर शिफ्ट होना
  • वैल्यू इवोल्यूशन: "टाइम-एंड-मटीरियल" बिलिंग से प्रोप्राइटरी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) से चलने वाली आउटकम-ओरिएंटेड सर्विसेज़ की ओर बढ़ना।

 

पाँच प्राथमिकता वाले विकास लीवर

रोडमैप में इस दशकीय बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए पांच खास पिलर्स की पहचान की गई है:

  • एजेंटिक AI: अलग-अलग इंडस्ट्रियल वर्टिकल्स में खुद से फैसले लेने और मुश्किल काम करने में सक्षम ऑटोनॉमस AI सिस्टम बनाना।
  • सॉफ्टवेयर और प्रोडक्ट्स: "सिर्फ़ सर्विस" एक्सपोर्ट से ज़्यादा मार्जिन वाले SaaS (सॉफ्टवेयर एज़ सर्विस) प्लेटफॉर्म और ब्रांडेड सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स में बदलाव को बढ़ावा देना।
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: सॉवरेन क्लाउड सर्विसेज़, हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स और घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार को प्राथमिकता देना ।
  • इनोवेशन-लेड इंजीनियरिंग: डीप-टेक R&D, स्पेशलाइज्ड चिप डिजाइन (VLSI), और एम्बेडेड सिस्टम इंजीनियरिंग को बढ़ाना।
  • इंडिया-फॉर-इंडिया सॉल्यूशंस: हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और गवर्नेंस में घरेलू चुनौतियों के लिए खास AI सॉल्यूशंस बनाना, जिन्हें बाद में दूसरे उभरते मार्केट में एक्सपोर्ट किया जा सके।

 

तुलना तालिका: पीढ़ीगत बदलाव

विशेषता

पारंपरिक श्रम-आर्बिट्रेज मॉडल

AI-नेटिव / IP-लेड रोडमैप (2035)

प्राथमिक मूल्य चालक

कॉस्ट एफिशिएंसी: सैलरी के अंतर (मैन-आवर्स) के आधार पर बचत।

वैल्यू क्रिएशन: बिज़नेस के नतीजों और इंटेलिजेंट ऑटोमेशन पर आधारित रेवेन्यू।

बिलिंग संरचना

समय और सामान: लोगों की संख्या और काम किए गए घंटों के हिसाब से चार्ज करना।

परिणाम-उन्मुख: परिणाम, प्रदर्शन या सदस्यता ( SaaS ) के लिए शुल्क लेना।

विकास इंजन

हेडकाउंट बढ़ाना: स्केलिंग के लिए एक के बाद एक ज़्यादा कर्मचारियों को हायर करने की ज़रूरत होती है।

टेक्नोलॉजिकल फ़ायदा: AI एजेंट और प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए स्केलिंग।

मुख्य पेशकश

सिर्फ़ सर्विस: इम्प्लीमेंटेशन, मेंटेनेंस और बैक-ऑफ़िस सपोर्ट।

IP-ड्रिवन: सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट्स, AI मॉडल्स और " एजेंटिक " सिस्टम्स का ओनरशिप।

प्रतिभा फोकस

स्टैंडर्ड स्किल्स: डेवलपर्स और सपोर्ट स्टाफ का बड़ा पूल।

डीप टेक एक्सपर्टाइज़: AI आर्किटेक्चर, चिप डिज़ाइन और R&D में स्पेशलाइज़्ड रोल।

प्रतिस्पर्धा में बढ़त

ऑपरेशनल स्केल: "दुनिया का बैक ऑफिस" होना।

स्ट्रेटेजिक इनोवेशन: "AI एंटरप्राइजेज का आर्किटेक्ट" बनना।




सामरिक महत्व

रोडमैप AI को सिर्फ़ एक टूल के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल बदलाव के पॉइंट के तौर पर दिखाता है । "AI-नेटिव" सर्विसेज़ पर फ़ोकस करके, भारत का मकसद ग्लोबल वैल्यू चेन के टॉप लेवल पर कब्ज़ा करना है, यह पक्का करते हुए कि " विकसित भारत" विज़न सिर्फ़ इम्पोर्टेड सिस्टम के बजाय देसी टेक्नोलॉजिकल सफलताओं से चले।

 

आगे बढ़ने का रास्ता

  • स्किल री-ओरिएंटेशन: मौजूदा वर्कफोर्स को जेनरेटिव AI और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग में बड़े पैमाने पर अपस्किल करना ।
  • IP प्रोटेक्शन: फर्मों को सर्विस डिलीवरी से प्रोडक्ट बनाने की ओर बढ़ने के लिए बढ़ावा देने के लिए पेटेंट सिस्टम को मजबूत करना।
  • कंप्यूट एक्सेस: इंडियाAI मिशन के ज़रिए स्टार्टअप्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) तक सस्ती पहुंच पक्का करना ।
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