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रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)

. रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी)

प्रसंग

29 दिसंबर 2025 को , राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने ~₹79,000 करोड़ के कैपिटल एक्विजिशन प्रस्तावों के लिए एक्सेप्टेंस ऑफ़ नेसेसिटी (AoN) दी । कैलेंडर साल की इस आखिरी DAC मीटिंग में आत्मनिर्भर भारत विज़न के मुताबिक, स्वदेशी लड़ाकू क्षमता , काउंटर-ड्रोन सिस्टम और लंबी दूरी के सटीक हथियारों पर ज़ोर दिया गया ।

 

परिषद के बारे में

  • नेचर: 1999 के कारगिल युद्ध के बाद ग्रुप ऑफ़ मिनिस्टर्स (GoM) की सिफारिशों पर 2001 में एग्जीक्यूटिव बॉडी बनाई गई ।
     यह कोई संवैधानिक या कानूनी संस्था नहीं है।
     
  • भूमिका: रक्षा मंत्रालय के तहत भारतीय सशस्त्र बलों के लिए हथियारों, प्लेटफार्मों और उपकरणों की पूंजी खरीद के लिए सर्वोच्च निर्णय लेने वाला प्राधिकरण ।
     
  • चेयरमैन: केंद्रीय रक्षा मंत्री।
     
  • संघटन:
     
    • रक्षा राज्य मंत्री
       
    • चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस)
       
    • सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख
       
    • महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल
       
    • रक्षा सचिव एवं सचिव (रक्षा उत्पादन)
       
    • अध्यक्ष, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)
       

 

हाल की स्वीकृतियाँ (दिसंबर 2025)

सेना

  • पिनाका MBRL (लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट्स): बेहतर रेंज, सटीकता और डीप-स्ट्राइक क्षमता।
     
  • काउंटर-ड्रोन सिस्टम: ज़रूरी एसेट्स की सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम (IDD&IS) Mk-II।
     
  • लोइटर म्यूनिशन सिस्टम: टाइम-सेंसिटिव टैक्टिकल टारगेट पर सटीक निशाना।
     

वायु सेना

  • एस्ट्रा Mk-II मिसाइलें: एडवांस्ड बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) एयर-टू-एयर मिसाइलें जो स्टैंडऑफ कॉम्बैट को मुमकिन बनाती हैं।
     
  • SPICE-1000 किट: सटीक गाइडेंस किट जो पारंपरिक बमों को लंबी दूरी के स्मार्ट हथियारों में बदल देती हैं।
     

नौसेना

  • हेल RPAS (लीजिंग): समुद्री निगरानी और ISR के लिए हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन।
     
  • सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (HF SDR मैनपैक): सुरक्षित, लंबी दूरी का नेवल कम्युनिकेशन।
     

 

खरीद ढांचा (प्राथमिकता क्रम)

  1. खरीदें (इंडियन-IDDM): देश में ही डिज़ाइन, डेवलप और बनाया गया (सबसे ज़्यादा प्राथमिकता)।
     
  2. खरीदें (भारतीय): भारतीय विक्रेताओं से सीधे खरीदें।
     
  3. खरीदें और बनाएं (भारतीय): शुरुआती आयात के बाद प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) के साथ स्वदेशी उत्पादन
     
  4. बनाना: शुरू से आखिर तक स्वदेशी R&D, विकास और उत्पादन।
     

 

चुनौतियां

  • टेक्नोलॉजी की मुश्किल: ड्रोन, EW, और AI में तेज़ी से हो रहे बदलाव के लिए सर्विसेज़ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट (SQRs) को बार-बार अपडेट करने की ज़रूरत होती है
     
  • टाइम लैग: AoN और फ़ाइनल कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग
    के बीच अक्सर काफ़ी देरी होती है ।

 

आगे बढ़ने का रास्ता

  • सुधारों का साल (2025): प्रोसेस को आसान बनाना, टाइमलाइन को कम करना, और ब्यूरोक्रेटिक लेयर को कम करना।
     
  • स्वदेशीकरण को बढ़ाना: इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करने और घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए
    Buy (Indian-IDDM) पर ज़्यादा भरोसा ।

 

निष्कर्ष

दिसंबर 2025 के DAC अप्रूवल सटीक हमला , बिना पायलट वाले सिस्टम और स्वदेशी क्षमता विकास की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाते हैं । घरेलू डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता देकर, DAC भारत की रक्षा तैयारियों को मज़बूत करता है, साथ ही बाहरी सप्लाई-चेन की कमज़ोरियों और बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों से मिलिट्री मॉडर्नाइज़ेशन को बचाता है।

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