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फॉरएवर केमिकल्स

फॉरएवर केमिकल्स

प्रसंग

पेर- और पॉलीफ्लोरोएल्काइल सब्सटेंस (PFAS) की जांच तेज कर दी है । अक्सर "फॉरएवर केमिकल्स" कहे जाने वाले ये सब्सटेंस इंडस्ट्रियल चमत्कार से पब्लिक हेल्थ की प्राथमिकता बन गए हैं, क्योंकि ग्लोबल वॉटर सप्लाई और इंसानी खून में इनकी मौजूदगी को नकारा नहीं जा सकता।

 

समाचार के बारे में

  • कंटैमिनेशन का लेवल: 2025-2026 में हुई हालिया स्टडीज़ में अंटार्कटिका और तिब्बती पठार समेत धरती के कुछ सबसे दूर के इलाकों में बारिश के पानी में PFAS का पता चला है, जिससे पता चलता है कि इन सिंथेटिक्स से कोई भी एनवायरनमेंट सच में "साफ़" नहीं है।
  • रेगुलेटरी बदलाव: EU और कई US राज्यों समेत बड़ी इकॉनमी ने पीने के पानी में PFAS के लिए सख्त "मैक्सिमम कंटैमिनेंट लेवल्स" (MCLs) लागू करना शुरू कर दिया है, जिससे वॉटर ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर बदलाव करने पड़ रहे हैं।

 

केमिस्ट्री: "हमेशा के लिए" मैकेनिज्म

PFAS की ड्यूरेबिलिटी उनके यूनिक मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर का नतीजा है।

  • CF बॉन्ड: PFAS को फ्लोरीन एटम से जुड़े कार्बन एटम की एक चेन से डिफाइन किया जाता है। कार्बन-फ्लोरीन (CF) बॉन्ड ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में सबसे मजबूत बॉन्ड में से एक है।
  • गुण: यह बंधन कुदरती तरीकों (बैक्टीरिया, सूरज की रोशनी या पानी) से लगभग टूटता नहीं है, जिससे केमिकल गर्मी, तेल और पानी से बच जाते हैं।
  • सर्फैक्टेंट नेचर: मॉलिक्यूल का एक सिरा हाइड्रोफोबिक (पानी को दूर भगाने वाला) और लिपोफोबिक (तेल को दूर भगाने वाला) होता है, जबकि दूसरा हाइड्रोफिलिक (पानी को खींचने वाला) होता है, जिससे वे इंडस्ट्रियल कोटिंग्स में बहुत असरदार होते हैं।

 

सामान्य उपयोग और जोखिम मार्ग

PFAS 1940 के दशक से ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल हो गए हैं।

  • कंज्यूमर गुड्स: नॉन-स्टिक कुकवेयर (PTFE/Teflon), ग्रीस-रेसिस्टेंट फूड रैपर, दाग-रोधी कालीन, और "ब्रीदेबल" वॉटरप्रूफ कपड़े (Gore-Tex)।
  • इंडस्ट्रियल इस्तेमाल: एक्वस फिल्म-फॉर्मिंग फोम (AFFF) का इस्तेमाल एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस पर हाई-हीट जेट फ्यूल की आग बुझाने के लिए किया जाता है।
  • पर्सनल केयर: शैंपू, डेंटल फ्लॉस, और कॉस्मेटिक्स (खासकर "लॉन्ग-वियर" या "वॉटरप्रूफ" वैरायटी)।

 

स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिम

क्योंकि PFAS टूटते नहीं हैं, वे बायो-एक्युमुलेट होते हैं , जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे वे फूड चेन में ऊपर जाते हैं, उनका कंसंट्रेशन बढ़ता जाता है।

  • इंसानों पर असर: ये खून में प्रोटीन से जुड़ जाते हैं और लिवर और किडनी में सालों तक रह सकते हैं।
  • मेडिकल लिंक: एक्सपोज़र क्लिनिकली इनसे जुड़ा है:
    • इम्यून सप्रेशन: बच्चों में वैक्सीन का असर कम होना।
    • हार्मोनल गड़बड़ी: थायरॉइड की बीमारी और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं।
    • ऑन्कोलॉजी: किडनी और टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
    • डेवलपमेंटल: बच्चों का जन्म के समय कम वज़न और डेवलपमेंट में देरी।

 

नियामक ढांचा

यंत्र

भूमिका

स्टॉकहोम कन्वेंशन

एक इंटरनेशनल ट्रीटी जो खास PFAS (जैसे PFOS और PFOA) को परसिस्टेंट ऑर्गेनिक पॉल्यूटेंट्स (POPs) के तौर पर लिस्ट करती है , और उन्हें खत्म करने को ज़रूरी बनाती है।

रीच (ईयू)

एक "एहतियाती सिद्धांत" लागू करता है, जो पूरे PFAS क्लास के सभी गैर-ज़रूरी इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगाने पर ज़ोर देता है।

ईपीए (यूएसए)

2024-2025 तक पब्लिक पीने के पानी के सिस्टम में PFAS के लिए कानूनी तौर पर लागू होने वाली लिमिट तय की गईं।

 

आगे बढ़ने का रास्ता

  • सुधार टेक्नोलॉजी: CF बॉन्ड को असल में खत्म करने के लिए ग्रेन्युलर एक्टिवेटेड कार्बन (GAC) , आयन एक्सचेंज रेजिन, और नए "सुपरक्रिटिकल वॉटर ऑक्सीडेशन" (SCWO) जैसे हाई-टेक फिल्ट्रेशन का इस्तेमाल ।
  • ग्रीन केमिस्ट्री: इंडस्ट्रीज़ को PFAS-फ्री ऑप्शन की ओर ले जाना, जैसे सिलिकॉन-बेस्ड कोटिंग्स या वैक्स-बेस्ड वॉटर रिपेलेंट्स।
  • यूनिवर्सल स्क्रीनिंग: एयरपोर्ट या मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के पास रहने वाली हाई-रिस्क आबादी के लिए ब्लड-सीरम टेस्टिंग बढ़ाना।

 

निष्कर्ष

PFAS की चुनौती उनके हर जगह होने और लंबे समय तक चलने में है। जहाँ उन्होंने 20वीं सदी की इंडस्ट्रीज़ को बेमिसाल सुविधा दी, वहीं 21वीं सदी का काम धरती को "डी-फ्लोरिनेट" करना है ताकि कई पीढ़ियों तक चलने वाले हेल्थ संकट को रोका जा सके।

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