50% टैरिफ लगाने की वजह से भारत के एक्सपोर्ट माहौल में काफी उतार-चढ़ाव आया , जिसमें बेसलाइन ड्यूटी, रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस के साथ ट्रेड से जुड़े पेनल्टी शामिल थे। इसके बावजूद, भारत ने FY 2025–26 की पहली छमाही में रिकॉर्ड एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस हासिल की, जो इलेक्ट्रॉनिक्स की तरफ स्ट्रेटेजिक झुकाव और दूसरे ग्लोबल मार्केट में तेज़ी से डाइवर्सिफिकेशन की वजह से हुआ।
पृष्ठभूमि:
US, जो पारंपरिक रूप से भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है, ने अप्रैल 2025 से कई प्रोटेक्शनिस्ट उपाय लागू किए। 27 अगस्त, 2025 तक, ज़्यादातर भारतीय एक्सपोर्ट पर कुल 50% टैरिफ लगा, जिससे वियतनाम, बांग्लादेश और मेक्सिको जैसे कॉम्पिटिटर के मुकाबले प्राइस कॉम्पिटिटिवनेस पर बहुत बुरा असर पड़ा।
मुख्य रुझान:
US टैरिफ सिस्टम ने "ट्रेडिशनल" और "मॉडर्न" एक्सपोर्ट सेक्टर के बीच साफ़ फर्क पैदा कर दिया:
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क्षेत्र |
प्रभाव |
प्रदर्शन हाइलाइट |
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स्मार्टफोन |
उच्च विकास |
US को एक्सपोर्ट तीन गुना से ज़्यादा बढ़ा (अप्रैल-अक्टूबर 2025 में $10.78B). |
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इलेक्ट्रानिक्स |
उच्च विकास |
~42% की बढ़ोतरी हुई , कई आपसी ड्यूटी से छूट मिली। |
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समुद्री उत्पाद |
गिरावट |
US जाने वाले शिपमेंट में गिरावट आई; इसे चीन (+24%) और वियतनाम (+123%) की ओर भेजा गया । |
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वस्त्र/कपास |
गिरावट |
US में डिमांड में तेज़ गिरावट; फोकस यूरोपियन यूनियन पर शिफ्ट हो गया । |
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रत्न और आभूषण |
गिरावट |
सबसे ज़्यादा प्रभावित सेक्टर में से एक; कुछ क्लस्टर में टर्नओवर 50% तक गिर गया । |
"US शॉक" को कम करने की भारत की स्ट्रैटेजी में तीन तरह के तरीके शामिल थे:
1. भौगोलिक विविधीकरण:
एक्सपोर्टर्स ने नॉन-ट्रेडिशनल मार्केट में जाकर "ट्रेड को पानी की तरह" (अपना रास्ता खुद ढूंढते हुए) इस्तेमाल किया।
2. उत्पाद मूल्य-वर्धन:
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत, भारत कच्चे माल के एक्सपोर्टर से ज़्यादा कीमत वाले तैयार सामान, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग के एक्सपोर्टर में बदल गया।
3. नीतिगत हस्तक्षेप:
"ईयर ऑफ़ टैरिफ़" (2025) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्ट्रेस टेस्ट जैसा था। जहाँ US के प्रोटेक्शनिज़्म ने पारंपरिक सेक्टर्स को नुकसान पहुँचाया, वहीं इसने भारत को एक ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में तेज़ी से आगे बढ़ाया और इसके ट्रेड पार्टनर्स के ज़रूरी डायवर्सिफ़िकेशन को मजबूर किया, जिससे आखिरकार 2026 के लिए एक ज़्यादा मज़बूत और मॉडर्न एक्सपोर्ट इकोसिस्टम बना।